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नशा क्यू करते हैं आज कल युवा वर्ग कोयतूर समाज

*सेवा 🙏🙏जोहार आप सभी बुद्धि जीवी सगा जनों को मेरा*
आज का इस पोस्ट को अच्छे से पढ़े ताकि भविष्य में कोई भी GYP के युवा ये गलती ना करें और इस लेख को पढ़ने के बाद विचार जरूर करना हो सकता है *कुछ लोगो को बुरा लगे क्यू की ये लेख ही एसा है माफी चाहूंगा कुछ शब्द कड़क है*

  आप सभी ने गौर किया होंगा इस बात पर की हमारे कोया बिडार - कोयतूर समुदाय कोयापुनेम -गोंडी धर्म को छोड़के *ईसाई धर्म* को अपनाने लगे है क्यू ?? आज इस बात को लेकर चर्चा करेंगे 
   
 पहली बात की कोया समाज बहुत भोला है ज्यादा पढ़ा लिखा भी नही और तर्क तो ओ कभी करता भी नही है अगर तर्क और विचार करता तो आज ये दिन देखना भी नही पढ़ता 

 Important बात ईसाई धर्म को क्यू अपना रहे अपने ये समाज के लोग    
 जिसमे 👉 जो भी इस धर्म को अपना ता है ओ उसे हमेशा के लिए गोंडी संस्कृति को छोड़ना पड़ता। है जिस में नशा नही , दारू भी नही , जिसमे मांस मटन भी नही , जिसमे बीड़ी सिगरेट पीने में प्रबंधित रहता है इस धर्म को अपनाते है ओ इन चीजों का सेवन नही करते अब 👇
जाहिर सी बात है की जो इंसान नशा नही करेगा ओ ज्यादा परेशानी में नही रहेगा । अपने लोगो का क्या विचार आता है देखिए की गोंडी धर्म को छोड़ा तो मैं सुख शांति से रह रहा हूं ऐसा बोलते ओ लोग 
इन नशा को हम लोग छोड़ सकते बस सोच और विचार होना गोंडी धर्म को मानकर भी नशा को छोड़ सकते है जरूरी नही की ईसाई धर्म हो या अन्य धर्म को मानोगे तो सुख से रहोगे ईसाई मिशनरियों का बहुत बड़ा मिशन है की अपने गोंडियनो को ईसाई धर्म की ओर ले जा रहे है 😡😡😡
 पर बात आती है की कोया संस्कृति इतना महत्व क्यू है कोया संस्कृति को क्यू मानना चाहिए इसमे *टोटेम की वेवस्था है*...
सगा की व्यवस्था होती है , प्रकृति को बेलेंश करने के लिए जरूरत चीजे ......= दिया जाता है , इसमें अपने स्वयं के पूर्वज को मानते है 
 इसमे प्रकृति से जुड़े अपने पुरखे है , इस कोया पुनेम में विज्ञान है । इस कोया पुनेंम में ओ व्यवस्था है जो बाकी किसी धर्म में नही है इस कोया पुनेम में ओ व्यवस्था है जो कोया समाज को एकता का आगाज करता है इस पुनेम की जितनी भी तारीफ करू या विश्लेषण करू तो वह बहुत कम ही है । 

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  अब अपने समाज के युवा कह जाए तो इतना जल्दी नशेड़ी नशा का शिकार क्यू बन रहे आर्थिक स्थिति से पिछड़ा पन क्यू मुख्य बात युवा के दादा दादी - नाना नानी और जो भी हसने वाले होते है इनके रिलेटिव घर में ओ 👉 जो भी नेन्ग होता है उसमे मुख्य तौर पे दारू , बीड़ी , ओर नशा के काम आनी वाली अवशेष । युवा को दिया जाता है दादा दादी - नाना नानी कोई भी नेंग होता है तो वे लोग अपने नाती पोते , पोती को जरूर इन सब चीजों का सेवन करवाते हैं अब कैसे ओ जान लेते है 
👉 घर में दादा जी जो होते है अपने नाती पोते को बीड़ी जलाने को कहते है , 
 दारू लाने को उनके हाथ में पैसे देते है चर्श गंजा वह कई अवशेष को नाती पोते या बेटा बेटी के हाथ में बुलाया जाता 
पर *सोचने* वाली बात है इनके अलावा बेटा है या बेटी है या नाती है या पोता को नही बताएंगे तो किसको बताएंगे काम ये सब चीज लाने को एसी बात आ जाती है 
 पर एक बार प्रकाश जरूर डाले की ये सब करवाने से युवा पीढ़ी के ऊपर क्या असर होता होगा  
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 पहली बात जब नाती को बीड़ी जलाने को भेजते है तो वह चुपके से बीड़ी को जलाने के बाद उसे पीके देखता है की कैसा लगता है 
जिससे उसका चस्का उसे बचपन से ही लग जाता है सेम उसी प्रकार दारू के लिए भी भेजते है तो उसे ओ पी कर देखता है चाट कर देखता है की कैसा लगता है मैंने कई बार देखा हूं और अजमाया भी बच्चो को शुरू से ही नशा का शिकार हो जाते है बचपन से ......
ओर इसका पूरा क पूरा श्रेय उनके नाना नानी और दादा दादी को जाता है इतना खुशियाली में ओ लोग बच्चो को ये सब सिखा देते है । 
 बड़ी भयंकर परिणाम मिलता है इसका 
 ओर जब बच्चे बड़े हो जाते तो हम कहते की दारू छोड़ो बीड़ी छोड़ो नशा छोड़ो ......

पर ओ छोड़ नही पाते 

तो आज से आप सभी मांदी में बैठे तो इन पर जरा चर्चा करके देखना क्यू की ये बहुत महत्व पूर्ण विषय है   

ईसाई धर्म को नही अपना ना कोई भी *कोया पुनेम- गोंडी धर्म ही सत्य का मार्ग है* 
 
धन्यवाद 🙏 

*आपका अपना*
*सुबु रावेन गोंड*
7987252232
*गोंड युवा प्रकोष्ठ बालाघाट मध्यप्रदेश*
*जिला मीडिया प्रभारी*

*🙏सेवा 🙏सेवा 🙏 सेवा 💐 जोहार*

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